Updated : 4 May , 2021
तब कहीं एक सुबह होती है
जो छाया हो अंधेरा इस रूह पर
मैत्री उस पर भी एक रोशनदान होती है ,
रिश्ते भले हों लाखों जहां में
पर जज़्बातों में ये सबसे पाक होती है ,
कितना ही गहरा हो इश्क़ चाहे
पर दोस्ती की अपनी एक मुकाम होती है ।
वफ़ा बेवफ़ा से हदें इसकी पार होती हैं ,
ये हरम नहीं किसी मोहब्बत का ,
जहां चर्चाएं ये आम होती हैं ।
मुलाकातों के आंकड़ों से नहीं यहां पहचान होती है ,
उलझनों से तंग , ना कभी इसकी लगाम होती है ।
तन्हाई में भी जो सुकून दे ,
ये वो प्रेम की बरसात होती है
भीग पाएं जो इसमें ,
तक़दीर उनकी बेहद ख़ास होती हैं ।
किसी रश , छल या दंभ की
ना रिक्त यहां स्थान होती है ,
पवित्रता से इसकी
वो भी नाकाम होती है ।
भागीदारी ना सिर्फ सुख की ,
यहां यातनाएं भी अक्सर उधार होती हैं
सही फरमाते हैं , सच्ची हो जो दोस्ती
तो वो जान ए जहान होती है ,
और जान पे तो फिर ,
ये ज़िंदगी भी कुर्बान होती है ।
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