Updated : April 14 , 2021
तो ये मुश्किल दौर भी गुजर जाएगा ,
अंधेरा तो है वक्त का पाबंद
सुबह के साथ ढल ही जाएगा।
चाहें गिरें या हारें ,
फिर उठ चल देंगे , दौड़ेंगे
जय तो संक्षिप्त है ,
उसका सार हो ना पाएगा ।
फिर कोशिशों से हार मान लें ,
ये हमसे ना हो पाएगा ।
हौसलों में हों बुलंदियां
तो मंज़िल तक का फासला
तय हो ही जाएगा ,
रिवायतें कहतीं हैं , कदम बढ़ा
तेरा एक एक कदम
मंज़िल तक ले जाएगा
फिर सफ़र आधा छोड़ के आना
ये हमसे ना हो पाएगा ।
मुश्किलों से तो साहस और बढ़ जाएगा
अगर रोकने आए रास्ता ,
तो ये जुर्रत और बढ़ाएगा ।
शिकस्त हों कितनीं भले ,
एक अंतिम दाव हर बार खेला जाएगा
हथियार नीचे डाल दें हम ,
ये वक्त कभी ना आएगा ।
हो मुस्तकबिल में जीत अगर
तो हर इम्तेहान शिकस्त खाएगा ,
मंजिलें हैं इतनी ऊंची हमारी
के ये आसमां भी कम पड़ जाएगा ।
सब्र की नुमाइश हमारी
कोई हालात कर ना पाएगा ,
हम पर फेंकें पत्थरों से
बनता इमारत , उसे भी दिख जाएगा ।
आलम ये होगा हर धर्म कल
इंसानियत का मोहताज़ हो जाएगा ,
चाहे हो खाकी , या हो चिकित्सा
हमारे एक सलाम का हकदार हो जाएगा ।
सफ़ल होगा हर श्रम हमारा
विपदा सब विध्वस्त हो जाएगा ।
0 Comments